Wednesday, 8 June 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,लश्कर से लेकर तालिबान सभी आंतकवादियों का मकसद एक है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,लश्कर से लेकर तालिबान सभी आंतकवादियों का मकसद एक है




भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएस कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ने दुख की घड़ी में हमेशा साथ दिया है। साथ ही मोदी ने यह भी कहा कि मुंबई हमलों के समय अमेरिका हमारे साथ खड़ा रहा।

उन्होंने आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि, आतंकवाद की एक ही परिभाषा- नफरत, हिंसा और हत्या। पाकिस्तान का नाम लिए बिना मोदी ने कहा कि आतंकवाद बमारे पड़ोस में पल रहा है। उन्होंने आतंकवाद पर बोलते हुए कहा कि लश्कर, तालिबान और ISIS सभी आतंकी एक हैं।

यूएस कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करने वाले मोदी भारत के 5वें पीएम हैं। यूएस कांग्रेस के संयुक्‍त सत्र को संबोधित करने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी सबसे पहले केपिटल हिल्‍स पहुंचे जहां उनका स्‍वागत किया गया।



Prime Minister Narendra Modi said addressing a joint session of the US Congress, the US, has always in mourning. Modi also said that the Mumbai attacks, the US stood with us. He hit hard on terrorism and said that the same definition of terrorism, hatred, violence and murder. Without naming Pakistan, he said that terrorism is the moment Bmare neighborhood. Speaking on terrorism, said the LeT, Taliban and ISIS are terrorists.


Modi is scheduled to address a joint session of the US Congress , India has the 5th PM . Before addressing a joint session of the US Congress , the first Prime Minister Narendra Modi arrived on Capitol Hill , where he was welcomed.

Sunday, 5 June 2016

सुलभा देशपांडे का 79 साल की उम्र में हुआ निधन. आप भी दें श्रद्धांजलि... Click Here








हिन्दी सिनेमा में अपनी बेहतरीन अदाकारी से बड़ा मुकाम हासिल करने वाली सुलभा देशपांडे का 79 साल की उम्र में हुआ निधन. आप भी दें श्रद्धांजलि...





रंगकर्मी और अभिनेत्री सुलभा देशपांडे का लंबी बीमारी के बाद मुंबई स्थित उनके आवास पर आज निधन हो गया. यह जानकारी उनके पारिवारिक सूत्रों ने दी. वह 79 साल की थीं.


विजय तेंदुलकर जैसे प्रख्यात नाट्य लेखकों द्वारा लिखे नाटकों में अभियन करने वाली सुलभा ने कई मराठी और हिन्दी फिल्मों तथा टीवी सीरियलों में काम किया था.


हिन्दी सिनेमा में उन्होंने ‘‘भूमिका (1977)’’, ‘‘अरविन्द देसाई की अजीब दास्तान (1978)’’, ‘‘गमन (1978)’’ में यादगार भूमिकाएं निभायी हैं. हाल के दिनों में वह गौरी शिन्दे निर्देशित फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ में नजर आयी थीं.


वह तेंदुलकर, विजय मेहता और सत्यदेव दुबे के साथ प्रतिष्ठित मराठी थियेटर ग्रुप ‘रंगायन’ से भी जुड़ी रहीं. उन्होंने अपने पति अरविन्द देशपांडे के साथ 1971 में थियेटर ग्रुप ‘अविष्कार’ का गठन किया था. उनके पति का 1987 में देहांत हो चुका था.

Friday, 3 June 2016

चौंकाने वाला सच! केजरीवाल सरकार का बड़ा घोटाला आया सामने

kejriwal bus scam

दिल्ली सरकार की ऐप बेस्ड प्रीमियम बस सर्विस 1 जून से लागू होनी थी। जो अब कई विवादों के चलते एसीबी की जांच के दायरे में आ चुकी है। इससे पहले बुधवार को विपक्ष नेता विजेंद्र गुप्ता ने संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली सरकार पर ऐप बेस्ड प्रीमियम बस सर्विस में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। इन आरोपों में भाजपा नेता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने गुड़गाव स्थित एक कंपनी को इस योजना के तहत लाभ पहुंचाया है, जिसके लिए उपराज्यपाल के नाम का इस्तेमाल भी किया गया। जबकि हक़ीक़त ये है कि दिल्ली सरकार ने इस योजना के लिए उपराज्यपाल से इजाज़त भी नहीं ली।


केजरीवाल सरकार का बड़ा घोटाला

“केजरीवाल सरकार की मंशा पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि केजरीवाल सरकार ने ऑड-इवन के नाम प्राइवेट बस ऑपरेटरों से 1200 बसें किराए पर ली और 42 रूपये प्रति किलोमीटर के भारी किराए के हिसाब से हर रोज 225 किलोमीटर का किराया देने की बात तय हुई। इसमें हैरान करने वाली बात ये रही कि बसों के ना चलने के बावजूद दिल्ली सरकार ये भारी-भरकम किराया चुकाएगी। 
यानी प्रति बस 9450 रूपये किराए के हिसाब से 1200 बसों का एक दिन का कुल किराया 1,13,40000 रूपये दिल्ली सरकार ने उन प्राइवेट बसों के मालिकों को दिया। ये आंकड़ा केवल 1 दिन का है अगर ऑड-इवन के 13 दिनों के बस किराए की बात की जाए तो ये आंकड़ा 14,74,20000 रूपये होता है। तो क्या 1200 बसें रोज चली थी जो इतना भारी किराया प्राइवेट बसों को दिया गया और इतना भारी किराया चुकाने के पीछे दिल्ली सरकार की मज़बूरी क्या रही! 
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार, बसों के औसत किराए पर गौर किया जाए तो आम आदमी पार्टी सरकार का 325 करोड़ का बजट था 3000 बसों के लिए यांनी 10.8 लाख प्रति नई बस। जबकि औसत किराया जो बसों को एक दिन का दिया गया वो 1.16 लाख रहा।
किराए पर ली गई प्राइवेट बसों को दी रकम एक नई बस की कीमत से कहीं ज्यादा थी। दिल्ली सरकार ने ये किराया किस आधार पर तय किया अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
ऑड-इवन की सफलता की बात दिल्ली सरकार के मंत्री से लेकर स्वंय मुख़्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल तक ने की। वहीँ कांग्रेस और बीजेपी ने इस ऑड-इवन की स्कीम को असफल करार दिया और बताया कि दिल्ली की जनता को इससे बहुत परेशानी हुई है और सरकार को ये स्कीम भविष्य में नहीं लागू करनी चाहिए।
दिल्ली में विपक्षी पार्टी बीजेपी का दावा है कि रोज 100 बसें तक भी नहीं चल पायी होंगी लेकिन इन गम्भीर आरोपों पर दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री से लेकर मुख़्यमंत्री तक ने चुप्पी साधी हुई है। दिल्ली सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई सफाई नहीं है और ना ही इस बात की पुष्टि की है कि 1200 बसें 13 दिनों तक रोज चलती थी।
ऑड-इवन की सफलता पर अपनी पीठ थपथपाने वाली दिल्ली सरकार ने जनता के सामने अभी तक इस कथित घोटाले के संबंध में कुछ नहीं कहा है।

पांच देशों के दौरे पर PM, नाश्ता दिल्ली में, लंच हेरात में, डिनर दोहा में

पांच देशों के दौरे पर PM, नाश्ता दिल्ली में, लंच हेरात में, डिनर दोहा में




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 

एक बार फिर से पांच देशों के तूफानी दौरे पर निकल रहे हैं. आज यानी चार जून की सुबह का नाश्ता वो दिल्ली में कर रहे हैं, तो दोपहर का भोजन अफगानिस्तान के हेरात शहर में और रात का खाना कतर की राजधानी दोहा में. जी हां! मोदी आज सुबह साढ़े नौ बजे दिल्ली से रवाना होंगे, दोपहर में हेरात पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अब्दुल गनी से होनी है. वहां लंच करने के बाद वो कतर के लिए रवाना होंगे, जहां शाम में न सिर्फ भारतीय समुदाय के लोगों से मिलने वाले हैं, बल्कि वहां वो कतर के शासक और वहां के व्यवसायी वर्ग से भी चार और पांच जून के कतर प्रवास के दौरान मिल रहे हैं.

पीएम मोदी का दौरा कितना तूफानी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज छह दिनों के अंदर न सिर्फ वो अफगानिस्तान, कतर, स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मैक्सिको यानी कुल मिलाकर पांच देशों का दौरा कर रहे हैं, बल्कि इस दौरान पूरे 45 घंटे यानी करीब दो दिनों तक हवाई जहाज में उड़ते रहने वाले हैं अपने इस विदेश दौरे को पूरा करने के लिए. ध्यान रहे कि इन सभी पांच देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनकी औपचारिक मुलाकात भी होनी है इस दौरान. अगर छह दिन की यात्रा के दौरान होने वाले पीएम के कुल आधिकारिक कार्यक्रमों की बात की जाए, तो ये संख्या चालीस के करीब हो जाती है यानी औसतन सात कार्यक्रम प्रति दिन.

ये कार्यक्रम भी तरह-तरह के हैं. एक तरफ मोदी जहां दोहा और वॉशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय के लोगों के साथ मुलाकात करने वाले हैं, तो दूसरी तरफ कतर, अमेरिका और मैक्सिको में वहां के स्थानीय व्यवसायियों और उद्योगपतियों के साथ.

मोदी अपनी विदेश यात्रा की शुरुआत हेरात से करने वाले हैं, उसका मकसद खास है. दरअसल मोदी वहां सलमा डैम के उदघाटन के कार्यक्रम में शरीक होने वाले हैं, जिसका निर्माण भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से हुआ है. हेरात के बाद आज शाम ही मोदी दोहा में होंगे. परसों का दिन भी वहीं बीताकर वे स्विटजरलैंड के लिए रवाना होंगे, जहां छह तारीख को बर्न में उनकी मुलाकात वहां के शासनाध्यक्ष से होनी है, जिसे कालाधन पर रोकथाम के सिलसिले में उनकी मुहिम के तौर पर देखा जा रहा है.

मोदी सात तारीख को अमेरिका में होंगे, जहां वो राजकीय मेहमान के तौर पर वाशिंगटन डीसी के ब्लेयर हाउस में रहेंगे. प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे के दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें लगी होंगी. एक तरफ जहां वो अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ उनके ओवल ऑफिस में सात जून को लंच के साथ ही द्विपक्षीय बातचीत करने वाले हैं, वही अगले दिन यानी आठ जून को वहां की कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद को संबोधित करने वाले हैं. अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने वाले मोदी पांचवें भारतीय प्रधानमंत्री होंगे.

मोदी इससे पहले बतौर प्रधानमंत्री पिछले दो वर्षों में अमेरिका का तीन बार दौरा कर चुके हैं. उनकी पहली यात्रा सितंबर 2014 में, तो दूसरी यात्रा सितंबर 2015 में और तीसरी इसी साल 31 मार्च से एक अप्रैल के बीच हुई थी, जब वो न्यूक्लियर सिक्यूरिटी सम्मिट में भाग लेने के लिए अमेरिका गये थे. पहले की तीनों यात्राएं अंतरराष्ट्रीय बैठकों के सिलसिले में हुई थीं, तो ये चौथा दौरा पूरी तरह द्विपक्षीय बातचीत और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने के लिए होने वाला है.

मोदी नौ तारीख को मैक्सिको में होंगे, जहां की राजधानी मैक्सिको सिटी में ही उनकी मुलाकात वहां के शासनाध्यक्ष से होनी है. ये मोदी के पांच देशों के दौरे का आखिरी आधिकारिक पड़ाव होगा. इसके बाद उनकी विदेश से वापसी का सिलसिला शुरु होगा और जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में टेक्नीकल स्टॉप के साथ ही दस जून की सुबह पांच बजे के करीब वो नई दिल्ली पहुंच जाएंगे. इस तरह महज छह दिनों के अंदर मोदी का पांच देशों का तूफानी विदेश प्रवास पूरा हो जाएगा. खास बात ये है कि मोदी पहले भी ऐसा तूफानी दौरा करते रहे हैं, जिसमें वो एक तिहाई समय विमान में होते हैं, तो दो तिहाई समय आधिकारिक कार्यक्रमों में एक के बाद एक शिरकत करने में. उनका मौजूदा दौरा भी इसी कड़ी में है और पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा ही तूफानी.

Thursday, 2 June 2016

DU: ऑनलाइन आवेदन करते समय इन बातों का रखें ख्याल








डीयू में पहली बार आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. इसके बावजूद छात्र कैंपस का रुख कर रहे हैं. दरअसल छात्रों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया तो पसंद आ रही है लेकिन कभी कोर्स तो कभी तकनीकी खामियों का कन्फ्यूजन उन्हें कैंपस आने पर मजबूर कर रहा है. ओपन डेज के दूसरे दिन छात्र ऑनलाइन फॉर्म की उलझने सुलझाते नजर आए.




यहां हो रही है कंफ्यूजन

रजिस्ट्रेशन में हो गई गलती, अब क्या करें? कंफर्मेशन मेल नहीं मिला तो क्या रजिस्ट्रेशन हो गया है ? फॉर्म भरते समय बेस्ट ऑफ फोर के लिए विषय गलत चुन लिया तो क्या फिर से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं? बीएससी पास करनी है, लेकिन कोर्स ऑप्शन में बीएससी ऑनर्स मेंशन है? कैसे विषय चुनें? ये कुछ चुनिंदा सवाल है जो ऑनलाइन फॉर्म भरते समय कई छात्रों के मन में उठते होंगे. ऐसी ही कुछ मुश्किलें इन छात्रों और उनके अभिभावकों को भी ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आईं. लिहाजा समस्या का हल ढूंढते हुए अभिभावक और छात्र डीयू के ओपन डेज में पहुंचे.




गुरप्रीत टुटेजा, डिप्टी डीन, डीएसडब्ल्यू ने कहा कि दरअसल डीयू करीबन 52 कोर्स ऑफर करता है. ऐसे में अक्सर छात्र मल्टीपल कोर्सेस के ऑप्शन चुनते हैं. कई बार बेस्ट ऑफ फोर के कैल्कुलेशन में भी छात्र गलतियां कर बैठते हैं. लिहाजा एक्सपर्ट की ये सलाह आपको सही तरीके से फॉर्म भरने और कोर्स चुनने में मदद करेगी.




कब तक कर सकते हैं फॉर्म में चेंज

इसके अलावा एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऑनलाइन फॉर्म भरते समय जब तक आपने फीस नहीं भरी है तब तक आप किसी भी गलती को सुधार सकते हैं. लेकिन एक बार ऑनलाइन फीस भर देने के बाद आपका वो फॉर्म एडिट नहीं हो पाएगा. ऐसी सूरत में आप नए यूजरनेम से फिर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. लेकिन पहली बार भरे गए फॉर्म के पैसे रिर्टन नहीं होंगे. इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि फीस जमा करने से पहले अपनी सभी इंफॉर्मेशन अच्छे से चेक कर लें.




ये है सेफ ऑप्शन


गुरपीत टुटेजा कहते हैं कि डीयू का ऑनलाइन फॉर्म भरते समय छात्र कॉलेज का ऑप्शन ना तलाशें. दरअसल छात्रों को सिर्फ कोर्स चुनना है. कटऑफ आने पर जिस जिस कॉलेज में वो कोर्स है जिसे आपने चुना है आप वहां दाखिला ले सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, बेहतर होगा कि छात्र अधिक से अधिक कोर्सेस का चुनाव करें. ताकि मनपसंद कोर्स या कॉलेज के कटऑफ नहीं आने पर भी उन्हें किसी ना किसी विषय और कॉलेज में दाखिला मिल जाए और उनका साल खराब ना हो.

Wednesday, 1 June 2016

मशहूर कॉमेडियन एक्टर रज्जाक खान को दिल का दौरा पड़ने से निधन

मशहूर कॉमेडियन एक्टर रज्जाक खान का दिल का दौरा पड़ने से निधन


नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन एक्टर रजाक खान का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है. उन्होंने बुधवार दोपहर आखिरी सांस ली. रजाक खान ने अपनी बेमिसाल अदाकारी और कॉमेडी के नए तर्ज़ और अंदाज़ से बॉलीवुड की अनेक फिल्मों में चार चांद लगाए. रजाक खान ने हैलो ब्रदर, हंगामा और हेरा फेरी सहित कई सुपरहिट फिल्मों में एक बेहतरीन कॉमेडियन की अमिट छाप छोड़ी.
बॉलीवुड उन्हें एक बेहतरीन अभिनेता, शानदार कॉमेडियन के तौर पर जानता हैं, लेकिन उन्हें जानने वाले गोल्डेन भाई के नाम से जानते हैं.
रज्जाक खान के दोस्त एक्टर शहजाद खान ने सोशल मीडिया पर उनकी मौत की खबर दी. रज्जाक खान की एक फोटो शेयर करते हुए शहजाद खान ने लिखा, “कार्डियक अरेस्ट के चलते मैंने अपने बड़े भाई रज्जाक को खो दिया है. उनके लिए प्रार्थना करें.”
कौन थे रज्जाक खान?
साल 1993 से फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले रज्जाक भाई अपने मरते दम तक फिल्मों में सक्रिय रहे.  साल 1999 में आई फिल्म बादशाह में अपने रोल मानिकचंद से सुर्खियों में आए. रज्जाक खान ने 1993 में फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ से बॉलीवुड में कदम रखा था. ये फिल्म दर्शकों ने काफी पसंद की थी जिसमें श्रीदेवी और अनिल कपूर मुख्य भूमिका में थे.

Tuesday, 31 May 2016

स्मृति ईरानी होंगी यूपी विधान सभा चुनाव में बीजेपी का चेहरा?

smriti irani
वो किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। उनका नाम और चेहरा एक समय घर-घर में बस चुका था। वो इतनी कुशल वक़्ता हैं कि अच्छे अच्छे राजनेता भी उनके सामने घबराते हैं।






राजनीति में प्रवेश किए उन्हें भले ही ज़्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन आज उनकी गिनती देश के शीर्ष नेताओं में होने लगी है।

संभवत: यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को उत्तर प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री पेश करने के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है।


‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ टीवी सीरियल के जरिए वे हर घर की मानों सदस्य ही बन गई थीं। फिर वे बीजेपी में शामिल हुईं और 2004 में दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के कपिल सिब्बल से क़रीबी लड़ाई में हार गईं।


नितिन गडकरी ने उन्हें बीजेपी महिला मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। लेकिन उनके असली राजनीतिक तेवर देखने को मिले 2014 के लोकसभा चुनाव में, जब उन्हें अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ख़िलाफ़ उतारा गया। उन्हें मात्र 15 दिन प्रचार करने का समय मिला, लेकिन अपनी परंपरागत सीट पर भी राहुल को जीतने के लिए बहन प्रियंका का सहारा लेना पड़ा था।


स्मृति चुनाव तो नहीं जीत पाईं, लेकिन अमेठी से उन्होंने संबंध क़ायम रखा. हर दुख-तकलीफ़ में शामिल होने का प्रयास किया। भले ही अमेठी के सांसद राहुल गांधी हों, लेकिन जब अमेठी के एक गाँव में आग लगी तो राहुल से पहले स्मृति वहाँ पहुँची।


हाल ही में दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में राष्ट्रविरोधी नारों के मामले में संसद के दोनों सदनों मे हुई बहस मे उन्होंने मायावती समेत अन्य विपक्षी दिग्गजों को जमकर जवाब दिए।





समृति ईरानी ने कहा कि उनकी जाति के बारे में किसा को पता ही नहीं है, तो कोई उनपर दलित विरोधी होने का आरोप कैसे लगा सकता है? प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर संसद में भाषण के लिए उन्हें बधाई दी थी।


पिछले कुछ दिनों से स्मृति ने अपना कार्यक्षेत्र अमेठी से बढ़ाकर लगभग पूरा यूपी कर लिया है। पिछले सप्ताह वे गोरखपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन संबोधित करने गई थीं। उससे पहले वो वाराणसी गई थीं।


माना जा रहा है ‘जातिहीन’ स्मृति ईरानी यूपी की जातिगत राजनीति में ऐसा मोहरा होंगी कि विपक्षी उसकी काट ढूंढ़ते रह जाएंगे। वो अपनी ‘तुलसी विरानी,’ की आदर्श बहू की छवि के साथ जनता के बीच पैठ बना लेंगी।


उत्तर प्रदेश की उनकी दावेदारी में केवल एक संदेह जताया जा रहा है कि क्या उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समर्थन और सहयोग मिलेगा? अभी तक संघ ने इस बारे में अपना स्पष्ट मत प्रकट नहीं किया है, लेकिन प्रधानमंत्री के मत से वह कितना अलग जा सकता है, इसमें संदेह है।


वैसे भी मोदी के क़रीबी माने जाने वाले संघ के संगठन मंत्री सुनील बंसल और ओम माथुर फिलहाल उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए बीजेपी के प्रभारी हैं। अगर ईरानी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बजाए बतौर प्रचार प्रमुख पेश किया जाता है तो वह रणनीति के तहत होगा, संघ के दबाव में नहीं।


लेकिन बीजेपी के पास ईरानी के अलावा मुख्यमंत्री पद के लिए कोई जाना पहचाना चेहरा नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य जैसे नए व्यक्ति को नियुक्त किया है। बिना चेहरे के केवल मोदी के नाम पर लड़ने का अंजाम, वह बिहार और दिल्ली में देख चुकी है।


अगर बीजेपी 2019 का लोकसभा चुनाव जीतना चाहती है तो 403 विधानसभा सीटों वाला उत्तर प्रदेश उसके लिए बहुत अहमियत रखता है। आख़िर इस प्रदेश ने ही 2014 में 80 में से 73 सीटें एनडीए की झोली में डालकर बीजेपी को पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।


हर लोकसभा सीट में वहाँ औसतन पाँच विधानसभा क्षेत्र आते हैं, यानी इस हिसाब से 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में 365 सीटें जीतना चाहिए।











लेकिन राजनीति में दो और दो चार कभी नहीं होते हैं। पिछले दो सालों में इस सूबे की राजनीति इतने करवट ले चुकी है कि माना जाने लगा है कि अगली मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी की मायावती होंगी हालाँकि उनकी पार्टी एक भी लोकसभा सीट जीतने में सफल नहीं हुई थी।



इसीलिए बीजेपी ने अगले साल फ़रवरी-मार्च में होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है। पिछले सप्ताह सहारनपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के साथ पार्टी ने चुनावी बिगुल बजा दिया है।